पंचलाइट कहानी का सारांश
फणीश्वरनाथ रेणु जी द्वारा लिखित ईस कहानी में मानवीय जीवन का वास्तविक चित्र खीचा गया है।
पाठ/कहानी का सारांश/कथावस्तु
गांव में रहने वाली विभिन्न जातियां अपनी अलग-अलग टोली बनाकर रहती है। उन्हीं में से महतो टोली के पंचों ने पिछले 15 महीने से दंड जुर्माने के जमा पैसों से रामनवमी के मेले से इस बार पेट्रोमैक्स खरीदा। पेट्रोमैक्स खरीदने के बाद बचे ₹10 से पूजा की सामग्री खरीदी गई पेट्रोमैक्स यानी पंचलाइट को देखने के लिए सभी बालक,औरतेें एवं मर्द इकट्ठे हो गए और सरदार ने अपनी पत्नी को आदेश दिया कि वह इसकी पूजा पाठ का प्रबंध करें।
पंलाइट को जलाने की समस्या
टोली के सभी जनपद के आने से अधिक उत्साहित हैं लेकिन उनके सामने एक बड़ी समस्या यह आ गई कि उसे जलाएगा कौन क्योंकि किसी भी व्यक्ति को उसे चलाना नहीं आता था वह तो डोली के किसी भी घर में अभी तक डिलीवरी नहीं चलाई गई थी क्योंकि सभी पंचलाइट की रोशनी को ही सभी और फैला हुआ देना चाहते थे पंचायत के जलने से पंचों के चेहरे उतर गए राजपूत टोली के लोग उनका मजाक बनाने लगे जिससे सपने पूर्वक सहन किया इसके बावजूद पंचों ने तय किया कि दूसरी टोली के व्यक्ति की मदद से नहीं जलाया जाएगा चाहे वह बिना जले ही पढ़ा रहे।
टोली द्वारा दी गई सजा भुगत रहे गोधन की खोज
गुलरी काकी की बेटी मुनरी गोधन से प्रेम करती थी और उसे पता था कि गोधन को पंचलैट चलाना आता है लेकिन गोधन का हुक्का पानी बंद कर दिया था। मुनरी ने अपनी सहेली और कनेली ने यह सूचना सरदार तक पहुंचा दी कि गोधन ‘पंचलैट' जलाना जानता है सभी पंचों ने सोच विचार कर निर्णय लिया कि गोधन के बुलाकर उसी से पंचलैट जलवाया जाए।
गोधन द्वारा पंचलाइट जलाना
सदार द्वारा भेजे गए छड़ी दार की कहानी से नहीं आने पर गोधन को मनाने गुलरी काकी गई। तब गोधन ने आकर पंचलैट में तेल भरा और जलाने के लिए स्प्रेड मांगा पुलिस टॉप स्पीड के अभाव से अभाव में उसने गरी नारियल के तेल से ही पंच लाइट जला दिया पंचायत के जलाते ही टोली के सभी सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ गई। कीर्तनिया लोगों ने एक स्वर में महावीर स्वामी की जय ध्वनि की और कीर्तन शुरू हो गया।
पंचों द्वारा गोधन को माफ करना
गोधन ने होशियारी से ‘पंचलाइट’ को जला दिया था, उससे सभी प्रभावित हुए थे। गोधन के प्रति सभी लोगों के दिल का मैल दूर हो गया। गोधन ने सभी का दिल जीत लिया। मुनरी ने बड़ी हसरत भरी निगाहों से गोधन को देखा। सरदार ने गोधन को अपने पास बुला कर कहा कि तुमने जात की इज्जत रखी है। तुम्हारे सात खून माफ। खूब गांवो सलीमा का गाना। अंत में गुलरी काकी ने गोधन को रात के खाने पर आमंत्रीत किया। गोधन ने एक बार फिर से मुनरी की ओर देखा और नजर मिलते ही लज्जा से मुनरी की पलकें झुक गई।

0 टिप्पणियाँ