कबीर दास जी का जीवनी

**कबीर दास का जीवनी (Kabir Das Ki Jivani):**

**1. आरंभ:**
   - कबीर दास, 15वीं सदी के सुप्रसिद्ध भक्ति कवि थे।
   - उनका जन्म कासी, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था, करीब 1440 ई. सन् में।

**2. युग-परिचय:**
   - कबीर ने भक्ति साहित्य के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया।
   - उनका समय साकारी तंत्र और भक्ति आंदोलन का था।

**3. जीवन का आध्यात्मिक दृष्टिकोण:**
   - कबीर ने वेदांत, संख्या योग, और सूफी तत्वों का संगम किया।
   - उनकी कविताएँ भक्ति, निराकारवाद, और सर्वोत्तमता की ओर मुख करती हैं।

**4. संगीत और भक्ति:**
   - कबीर दास ने अपनी कविताएँ गीत रूप में प्रस्तुत कीं जिन्हें सांगीतिक धाराओं में पॉपुलर बना दिया गया है।
   - उनके दोहे आज भी भजनों और संगीत की दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

**5. भक्ति में एकता का सिद्धांत:**
   - कबीर के द्वारा भक्ति में एकता, सर्वोत्तमता, और मानवता के सिद्धांत को बढ़ावा दिया गया।
   - उनके दोहे में उन्होंने जातिवाद और असमानता के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।

**6. मृत्यु और प्रशिक्षण:**
   - कबीर दास का अंतिम समय वाराणसी में बिता।
   - उनकी मृत्यु का विशेष विवरण नहीं है, लेकिन उनके विचार और कविताओं ने उन्हें अमर बना दिया है।

कबीर दास के दोहे और कविताएँ आज भी साधना, भक्ति, और जीवन के अमूल्य उपदेशों के रूप में माने जाते हैं, और उनका योगदान भारतीय साहित्य और सामाजिक सुधार की राहों में अमूर्त है।
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1. **बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।** - *जो मन खोजा अपना, तो मुझसे बुरा न कोय।* 2. **दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।** - *जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख कहाँ से होय।* 3. **जो तूको करे गौरी तो मैं भी तौल दूं,** - *काया के तौल न मिले तो कैसे चुकाऊं रौ।* 4. **माटी कहे कुम्हार से, तू क्यों रोंडा मैल,** - *एक दिन ऐसा आएगा, मैल तू भी सोयेगा।* 5. **गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागू पाय,** - *बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।*

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