Short story in hindi

गुलाब और कैक्टस की कहानी



एक बार एक जंगल में एक सुंदर लाल गुलाब खिल गया। जब गुलाब ने चारों ओर देखा तो उसने पाया कि हर कोई उसकी सुंदरता की प्रशंसा कर रहा था। एक पेड़ ने कहा, “काश मैं भी गुलाब की तरह सुंदर होता..”

गुलाब ने यह सुना और कहा, “मुझे पता है कि मैं इस जंगल का सबसे सुंदर फूल हूँ।”

इस पर दूसरे फूल ने जवाब दिया, “इतना घमंड मत करो। इस जंगल में और भी कई सुंदर फूल हैं।”

फिर एक दिन गुलाब ने एक कैक्टस देखा और कहा, “यह कितना बदसूरत पौधा है.. यह कांटों से भरा हुआ है।”

यह सुनकर दूसरे फूल ने कहा, “तुम ऐसा क्यों कहते हो?? कौन बता सकता है कि सुंदरता क्या होती है?? तुम्हारे पास भी कांटे हैं..”

गर्व से लाल गुलाब ने उस फूल को गुस्से से देखा और कहा, “तुम मेरी सुंदरता और कांटों की तुलना कैक्टस से नहीं कर सकते।”

गुलाब के आस-पास के सभी पेड़ और फूल सोच रहे थे, "कितना घमंडी फूल है..."

हर बीतते दिन के साथ गुलाब कैक्टस को अपमानजनक बातें कहता और उससे दूर जाना चाहता।

कैक्टस को कभी बुरा नहीं लगता था, वह हमेशा गुलाब से कहता था, "भगवान ने बिना किसी कारण के किसी भी तरह का जीवन नहीं बनाया है।"

समय बीतने के साथ मौसम बदल गया और बारिश न होने के कारण जंगल में जीवन कठिन हो गया। गुलाब मुरझाने लगा।

एक दिन गुलाब ने देखा कि पक्षी कैक्टस में अपनी चोंच डालते हैं और फिर तरोताजा होकर उड़ जाते हैं। गुलाब यह देखकर हैरान रह गया। फिर एक पेड़ ने गुलाब को समझाया कि पक्षी कैक्टस से मिलने वाले पानी से तरोताजा हो रहे हैं।

गुलाब ने पूछा, "क्या कैक्टस को दर्द नहीं होता जब पक्षी उसमें छेद करते हैं?"

पेड़ ने जवाब दिया, "हाँ, लेकिन कैक्टस को पक्षियों को पीड़ित देखना पसंद नहीं है।"

गुलाब ने आश्चर्य से अपनी आँखें खोलीं और कैक्टस के प्रति अपने व्यवहार पर शर्मिंदा महसूस किया और उसके लिए खेद महसूस किया।

नैतिक:
प्रकृति में हर किसी का एक उद्देश्य होता है और हमें किसी को उसके स्वरूप से नहीं आंकना चाहिए।  हमें दूसरों के स्वभाव में मौजूद अच्छाई को महत्व देना सीखना चाहिए।



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